dde
4f6

प्रत्येक परिवार, यहां तक कि भूमिहीन श्रमिक भी, पोषणिक सब्जियां उगा सकता है। यह बहुत ही आसान एवं लाभदायक है। इसमें आप काफी पैसा बचा सकते हैं तथा अपने परिवार में सुधार ला सकते हैं एवं इसके साथ ही आप जहरीले कीटनाशकों से ग्रस्त सब्जियां जो बाजारों में बेची जाती हैं से बच सकते हैं।

 

गृह उद्यान की किस्में

बड़े उद्यान (कम से कम 500 वर्ग मीटर) : एक बड़े उद्यान में एक अथवा दो बड़े फल के पौधों जैसे कि पपीता, अमरूद, नींबू, अंगूर एवं छोटे आम सहित कइ तरह की सब्जियां उगाई जा सकती हैं।

मध्यक आकार के उद्यान (150 से 200 वर्ग मीटर) : टमाटर, बैंगन, मेथी. मिर्च, फा्रंसबीन, लौकी, खीरा, पालक, चौलाई, मूली, शलजम, गाजर, सलाद, फूलगोभी, पत्तागोभी, समरस्क्वैश, भिण्डी, लोबिया, ज्वार में से कुछ भी उगा सकते हैं।

छोटे उद्यान (100 वर्ग मीटर से कम) : चौलाई, पालक, मेथी, मूली, शलजम, टमाटर, बैंगन, मिर्च, सलाद, पुदीना एवं ध्िनया में से कुछ भी उगाएं।

गमलों में उगाए जाने वाल पौधे : कुछ सब्जियां छत, खिड़कियों, बालकोनियों, बरामदा अथवा छत के ऊपर रखे गमलों एवं कंटेनरों में भी उगाई जा सकती हैं। कंटेनरों को बालू मिट्टी एवं खाद के साथ मिलाकर भर दें। इसमें आप मिर्च, टमाटर, धनियां, पुदीना, चौलाई, पालक, टेबलमूली, कुल्फा, सलाद, नोलडैशखोल, फै्रंचबीन, भिण्डी, मेथी, ज्वार, हरे प्याज, लहसुन, गन्दना, अजमोद, फूलगोभी एवं टमाटर में से कुछ भी उगा सकते हैं।

 

पोषण उद्यान प्रबन्धन

·                    समुचित दूरी पर पक्तियों अथवा रो में पौधों को लगाएं अथवा रोपण करें।

·                    अगर पौधों की संख्या एक जकह अधिक हो तो वहां से कुछ पौधों को हटा दें।

·                    अगर कई पौधे खराब हो जाते हैं तो उनके स्थान पर और पौधे उगाएं।

·                    रोपण के पश्चात् पौधाें की सिंचाई करें। पंक्तियों एवं पौधों के बीच की घास को हटा दें। सब्जियों के लिए उनकी अच्छी पैदावार एवं विकास के लिए उन्हे नियमित पानी देना जरूरी है।

·                    बडे ग़मलों में प्रत्येक तीसरे अथवा चौधे दिन गर्मियों में तथा प्रत्येक एक अथवा दो सप्ताह सर्दियों में सिंचाई करें।

·                    सब्जी के उद्यान हेतु फार्मयार्ड खाद एवं कम्पोस्ट महत्वपूर्ण खाद है। इन्हे बीजने अथवा रोपण करने से एक सप्ताह पहले मिट्टी के साथ मिला दें (वर्मी-कम्पोजटिंग एवं आर्गेनिक फर्मिंग देखें।

·                    नाईट्रोजीनस खाद जैसे कि यूरिया का इस्तेमाल करें। यह आप अच्छी पैदावार एवं पौधों के अच्छे विकास के लिए खड़ी फसलों में छोटी माला में करें। यूरिया का इस्तेमाल तभी करें जब मिट्टी थोड़ी सी नम हो अथवा इसके इस्तेमाल के पश्चात् इसकी थोड़ी सी सिंचाई करें।

उद्यान रचना : अपने पोषण उद्यान को बेहतर बनाने एवं नियोजित करने हेतु कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु।

·                    आपमे उद्यान को प्रचुर मात्रा में सौर्य ऊर्जा मिलनी चाहिए।

·                    आयताकार उद्यान चौकोर उद्यानों से बेहतर होते है, परन्तु उद्यानाें का कोई भी आकार हो सकता है।

·                    बड़े वृक्षों की छाया से बचाएं

·                    सम्भव हो तो जल स्त्रोत के निकट ही बनाए।

·                    सब्जियां जो कटाई के तुरन्त पश्चात् अपनी गुणवत्ताा एवं ताजगी अतिशीघ्र ही खो देती हैं जैसे कि पालक, चौलाई, मेथी, पुदीना एवं मूली को वरीयता दें।

·                    वे पौधे जिनकी जड़ें लम्बी होती हैं उन्हें क्यारियों को अलग करने वाली मेंड़ों पर उगाएं।

·                    सब्जियां जिनमें बेंलें होती हैं उनका स्थान बचाने के लिए अच्छा इस्तेमाल किया जा सकता है उन्हें फेन्सों, दीवारों पर चढ़ा दें अथवा छतों पर उगाएं।

नोट : अगर पाले का डर हो तो जब तक खतरा हो जब तग लगातार सिंचाई करें।

 

पेस्ट कंट्रोल

      पेस्ट एक गंभीर समस्या हो सकती है अत: संगठित पेस्ट मैनेजमेन्ट में विवरणित प्रभावी एवं सुरक्षित तकनीकी के इस्तेमाल द्वारा महंगी क्षति से बचें। इन साधारण तकनीक के इस्तेमाल द्वारा आप महंगे एवं खतरनाक कीटनाशकों से भी बच सकते हैं। शब्दावली में पौध सुरक्षा हेतु नीम तथा वर्जित एवं गैर अनुमोदी कीटनाशकों की सूची में देखें।

 

बाजार से खरीदी गई खादें

      नाइट्रोजीनस खादें जैसे कि यूरिया एवं अमोनियम सल्फेट एवं फास्फोरिक खादें जैस कि सिंगल सुपर फास्फेट एवं पोटेशिय खादें जैसे कि पोटाश की अच्छी सब्जियों एवं फलों की फसलों के लिए आवश्यकता होती है। सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं पोटाश को मिट्टी में मिलाया जाना चाहिए तथा यह कई कार्य बीजने अथवा रोपण से पहले किया जाना चाहिए। नाइट्रोजीनस खाद जैसे कि यूरिया को खड़ी फसलों में एक अथवा दो बार ऊपर से डालना चाहिए।

 

औजार

      उद्यान बनाने हेतु कुछ औजार बहुत ही उपयोगी हैं जैसे कि फावड़ा, खुर्पी, पानी डालने के लिए केन, सिक्कल, चाकू, डीलची, हाथ द्वारा चलाया जाने वाल स्प्रेयर, ट्वीन एवं बांस की स्टेक्स।

 

पोषणिक सब्जियां

      अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी मिनरल, विटामि, अमीनो एसिड्स, कार्बोहाइड्रेट्स एवं प्रोटीन की आपूर्ति कती हैं। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों को लगभग 300 ग्राम सब्जियों की आवश्यकता है, जिसमें 125 ग्राम हरे पत्ते वाली सब्जियां, 100 ग्राम जड़े एवं कन्द तथा 75 ग्राम अन्य सब्जियां होनी चाहिएं। परन्तु अधिकतर लोग इससे भी कम मात्रा को सेवन करते हैं। सब्जियों के साथ पोषणता के निम्न संयोग महत्वपूर्ण है :-6

कार्बोहाइड्रेट्स :      आलू, शकरकंद, कोलोकेसिया, चुकन्दर

प्रोटीन :            मटर, फलीदार फ्रासबीन, बरसेम, क्लस्टरबीन, चौलाई, ब्राडबीन

विटामिन ए : गाजर (पीली), पालक, शलजग, चौलाई, शक्करकन्द (पीली सतह), कद्दू (पीली सतह), पत्ताागोभी, फैन्यूग्रीक, टमाटर, धनिया, फूलगोभी, पर्सले (अजमोद)

विटामिन बी : मटर, कारपेट, लेग्यूम, लहसुन, कोलोकेसिया

विटामिन सी : टमाटर, शलजम, हरी मिर्र्च, फूलगोभी, नॉल-खॉल, करेला, मूली की पत्तिायां, चौलाई,बु्रसेल्स, स्प्रौउट्स, पर्सलें

कैल्शियम :         चुकन्दर, चौलाई, फैन्यूग्रीक, धनियां, कद्दू, प्याज, टमाटर

पोटेशियम :  शक्करकन्द, आलू, करेला, मूली, कारपेट, लेग्यूम

फॉस्फोरस :  लहसुन, मटर, करेला

लोहा :       करेला, चौलाई, पालक, फैन्यूग्रीक, पुदीना, भारतीय पालक

·                    अपने प्लाट के सबसे छायादार एवं अप्रयोज्य कोने में एक या दो कम्पोज्ट गङ्ढे खोदें।

 

सब्जियों की कटाई

·                    सब्जियों की कटाई उनके पूर्णतया तैयार होने पर ही की जाती है तथा इसका तुरन्त उपयोग करने पर अच्छा पोषण, स्वाद एवं फ्लेवर प्राप्त होता है।

·                    जड़ वाली सब्जियों को तभी काटें जब वे छोटे हों - देर से काटने से यह उपयोग के लिए ठीक नहीं होती हैं जैसे कि यह कड़बी, रेशेदार एवं अस्वादकर होती हैं।

·                    सभी फल एवं फलीदार सब्जियों की कटाई तभी करे जब वे अपने समुचित आकार में पहँच जाएं तथा कच्ची हों।

·                    तरबूज, टमाटर एवं पीला तुंबा को जब तक वह पक न जाए तब तक नहीं काटा जाता है।

·                    पत्तोदार सब्जियां जब वे कच्ची तथा हरी हों तभी काट लें।

·                    कद्दू, मिर्च, कोलोकेसिया टयूब एवं छोटी प्याज कच्चे एवं पक जाने पर काटा जा सकता है।

 

अलग-अलग मौसमों के लिए सब्जी सम्बन्धित फसलें

      भारत के उत्तारी क्षेत्र में सब्जी उगाने के तीन अलग-अलग मौसम हैं। प्रत्येक मौसम के अनुकूल उगाई जाने वाली सब्जियां है :-

शरद ऋतु (अक्तूबर - फरवरी)

      आलू, गोभी, पत्ताागोभी, नॉल-खॉल, फूलगोभी, गाजर, ब्रुसेल्स, स्प्रौट, करम कल्ला, मूली, शलगम, चुकन्दर, प्याज, लहसुन, लीक (गन्दना), पर्सले, अजवाइन, मटर, पालक, फैन्यूग्रीक, सरसों, धनियां, सौंफ, मेथी आदि।

ग्री्रष्म ऋतु (मार्च - जून)

      ओकरा मटर, क्लस्टर बीन, टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च, ग्वार फली, कद्दू, करेला, तोरई, लुफ्फा, खीरा, तरबूज, चौराई, कोलोकेसिया, शतावरी आदि।

वर्षा ऋतु (जुलाई - अक्तूबर)

      ओकरा, काडपी, क्लस्टर बीन, मिर्च, बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्च, कुकुरबिट सब्जियां (तरबूज को छोड़कर) मूली, शलगम, गाजर, शक्करकन्द, कोलोकेसिया आदि।

 

पोषण परिरक्षण

      अधिकतर लोग जब अपना भोजन पकाते हैं तो उसमें अमूल्य पोषण को नष्ट करे देते हैं। निम्न बिन्दु आपको पोषण आहार चुनने एवं तैयार करने में मदद करेंगे।

रेशदार भोजन का सेवन करें

 रेशेदार आहार अथवा मौटा आहार पाचन को बढ़ाता है। यह साबूत अनाजों, ताजे फलों, एवं सब्जियों में पाया जाता हैं। साबूत गेहूँ एवं ब्रेड, साबूत अनाज, कच्ची गाजरें एवं अन्य जड़ वाली फसलें, रेशेदार सब्जियों का अच्छा स्त्रोत हैं।

अपरिवकृत चावल का सेवन करें

याद रखें कि चावन बनाने के बाद शेष पानी काफी पौष्टिक होता है। ज्यादा से ज्यादा सलाद खाएं : सलाद आपकी भूख बढाता है तथा पाचन शक्ति बढ़ता है।

ताजे मौसमी फलों एवं सब्जियों का सेवन करें

फल एवं सब्जियां काफी पौष्टिक होती हैं तथा स्वादिष्ट होती हैं। मौसमों में ही सेवन करे तथा सम्पूर्ण वर्ष हेतु संरक्षित करें।

भोजन पकाते समय एवं प्रसंसीकरण के समय पोषण में होने वाली हानियों को आप निम्न तरीकों से कम कर सकते हैं :-

·                    जड़ वाली सब्जियों के पत्तो खाएं, जैसे कि शलगम, मूली, चुकन्दर एवं नॉल-खॉल उनके पत्तो जड़ से अधिक पौष्टिक होते हैं। इन्हे आलू अथवा पत्तोदार सब्जियों के साथ पकाएं।

·                    सब्जियों को प्रैशर कुक्कर में पकाएं। इससे समय की बचत होगी तथा विटामिन बी एवं सी दोनों निरन्तर मिलते रहेंगे।

·                    सलाद, फल एवं सब्जियां सबसे पहले धानी चाहिएं तथा इसके काटना चाहिए जिससे कि विटामिन बी एवं सी बनी रहे।

·                    फलों एवं सब्जियों को काटने के बाद तुरन्त पकाएं, सुरक्षित करें अथवा प्रसंसीकृत करें अन्यथा इससे पौष्टिक तत्वों की हानि होती है।

·                    हमेशा ताजे एवं उपयुक्त फल ही चुनें तथा पकाने के लिए सही एवं ताजी सब्जियां ही चुनें।

·                    हमेशा कम आंच पर पत्तोदार सब्जियाें को पकाएं। गाजर एवं कद्दू का ज्यादा आंच पर पकाया जा सकता है।

 

सब्जियाें एवं फसलों का परिरक्षण

1-                 हमेशा कच्ची सब्जियों जैसे कि फूलगोभी, अदरक, कमल गट्ठा, गाजर, मूली एवं कच्चे आम के टुकड़ो का ही चयन करें।

2-                कच्ची सामग्रियों के छिलके को निकालें, उन्हे काटें एवं धोएं।

3-                बनाई गई सामग्रियों को हमेशा ग्लास जारों में ही रखें

4-                3 प्रतिशत नमक, 0.8 प्रतिशत ग्लेसियल एसिटिक एसिड एवं 0.2 प्रतिशत पोटेशियम मेटाबिसल्फाइट के इस्तेमाल द्वारा पूर्व उबले नल के पानी में रसायन सौल्यूशन में तैयार करें।

5-                रसायन सौल्यूशन को ग्लास जार में डाल दें जिससे फल एवं सब्जियां हैं। उन्हें पूर्णतया डुबा दें (इस जार में जितनी सब्जियां एवं फल हैं उससे डेढ़ गुणा पानी डालें।

6-                जार को कसकर बंद कर दें और ठण्डे एवं सूख स्थान पर रखें।

7-                पकाने से पहले फलों एवं सब्जियों को अच्छे ढंग से धो लें। अचार, पकौड़े एवं चटनी के लिए संरक्षित मिश्रण डालने के तुरन्त पश्चात इस्तेमाल करें।

 

साबूत टमाटर पल्प का परिरक्षण

1-                 सबसे पहले पके, लाल एवं ताजे टमाटर लें।

2-                उन्हें धो लें और काट लें।

3-                इसे स्टेनलेस स्टील एवं एल्यूमिनियम के बर्तन में उबाल लें तथा इसे ब्लेंडर अथवा किसी उपकरण से पीस लें।

4-                इसे हल्के आंच पर तब तक उबालें जब तक कि इसका पूरा वनज 1/3 न हो जाए अर्थात गाढ़ा पेस्ट होने तक उबालें।

5-                जब वह पक जाए तब 5 मि.ली. ग्लेसियल एसटिक एसिड प्रत्येक कि.ग्रा. के पेस्ट में मिलाएं तथा 5-8 मिनट तक उबालें।

6-                तैयार उत्पाद के प्रत्येक किलोग्राम हेतु 0.4 ग्राम पोटेशियम मेटाबिसल्फाहट एवं 0.2 ग्राम सोडियम बैंजोएट मिलाएं और थोड़े से पानी में इसे मिश्रित कर लें। इसके बाद सभी को मिलाएं।

7-                गर्म पिसे हुए टमाटर पल्प को ऊपर तक सूखे साफ ग्लास जार में भर दें।

 

सब्जियों का लैक्टिक फर्मेंटेशन (दुग्ध अम्ल संधान)

1-                 ताजी पत्ताा गोभी एवं ताजी गाजरें लें।

2-                पत्ताागोभी की ऊपरी सतह के पत्तो निकाल दें और उसे पतला-पतला काटें। गाजर को भी छील लें और उसे पतले-पतले लम्बे काट लें। पत्ताागोभी एवं गाजर का अनुपात 1:1 का रखें।

3-                मिश्रित सब्जियों में 2.5 प्रति नमक मिलाएं तथा 1.5 प्रति राई का पाउडर मिलाएं।

4-                दो सप्ताह तक हर दिन इसे दो बार हिलाएं।

5-                फर्मेंटड उत्पाद खाने के लिए तैयार है।

 

परिरक्षण

      अपने फल एवं सब्जियों का परिक्षण अवश्य करें, जिससे कि आप इसका गैर मौसमों के समय भी आनंद ले सकें। इन्हे आप बोतल में चटनी के रूप में, अचार के रूप में, पल्प अथवा जूस के रूप में परिरक्षित कर सकते हैं अथवा धूप में सुखाकर भी रख सकते हैं। चीनी, नमक, मसालों, रसायन परिरक्षकों के द्वारा परिरक्षण की भी तकनीकी उपलब्ध हैं। अपने स्थानीय सरकारी पोषक विशेषज्ञों अथवा अपने समुदाय के किसी भी व्यक्ति से इसके बारे में जनता परामर्श करें तथा उनसे विभिन्न खाद्य परिरक्षण तकनीकी के बारे में जानें।

 

फर्मन्टेशन द्वारा परिरक्षण

      क्या आप सब्जियां उगाते हैं ? अगर हां, तो इस साधारण कम लागत के परिरक्षण तकनीकी को अपनाएं। मौसम जब अपनी चरम सीमा पर हो तब सब्जियों के संरक्षण द्वारा आप पूरे वर्ष पौष्टिक सब्जियों को आनन्द ले सकते हैं।

 

फर्मन्टेशन

      फर्मन्टेशन एक अनोखी तकनीक है जिसमें कई तरह की सब्जियों को एक ही समय में परिरक्षित किया जा सकता है। मिश्रित सब्जियों में से एक सब्जी पत्ताा गोभी होनी चाहिए क्योंकि पत्ताागोभी में ऐसा तत्व होता है जो कि फर्मन्टेशन में मदद करता है। अगर पत्ताा गोभी नहीं है तो मूली अथवा खीरा यह कार्य पूरा करता है।

 

विधि

1-                आलू, शक्करकन्द एवं अन्य सब्जी जिसमें कार्बोहाइड्रेट् नहीं हो को छोड़कर कोई भी सब्जी ले लें। साफ पानी में सब्जी को सही ढंग से धो लें। इसके बाद साफ सूखे कपड़े से इसे पोंछ दें।

2-               सम्पूर्ण मिश्रित सब्जी में आधा भाग पत्ताा गोभी का होना चाहिए। फिर सभी सब्जियां काट लें।

3-               कटी हुई सब्जियों में 22 ग्राम नमक (4-5 चम्मच) मिलाएं (प्रति किलोग्राम) तथा इसे पूरी तरह मिलाएं अथवा दो घंटे के लिए रहने दें।

4-               मिश्रण को ग्लास अथवा प्लास्टिक कंटेनर में डाल दें। कंटेनर का आकार आपकी आवश्यकता के आधार पर हो सकता है। अगर आप लकड़ी अथवा मिट्टी का कंटेनर इस्तेमाल कर सकते हैं तो इसे अंदर मोम से कोट कर दें।

5-               कटी हुई मिश्रित सब्जियों को इतना दबाएं कि ब्राइन्ड सॉल्यूशन ऊपर तक आ जाए।

6-               एक प्लास्टिक शीट (200 ग्राम गौज) लें जो कि कंटेनर के मुंह से दो गुणा हो तथा उससे कंटेनर को ढक दें।

7-               प्लास्टिक को नीचे की ओर दबाएं जिससे की सारी हवा निकल जाए।

8-               प्लास्टिक शीट पर पानी डालें जिससे शीट मिश्रित सब्जी को ऊपर से दबा दे।

9-               इसके बाद कंटेनर को बाहर से मोटे धागे से बांध दें।

10-           कंटेनर को ठण्डे स्थान पर रखें।

नोट : फर्मन्टेशन द्वारा सब्जियों को 3 माह तक परिरक्षित किया जा सकता है। परन्तु एक बार कंटेनर खुल जाए तो उसमें रखी सब्जियों का इस्तेमाल भी उसी दिन करना पड़ता है। अगर यह सम्भव नहीं हो तो शेष सब्जियां बौटलिंग, रेफ्रिजरेशन अथवा परिरक्षण के इस्तेमाल द्वारा परिरक्षित रखी जाती हैं।

 

सॉफ्ट ड्रिंक

      ताजा सॉफ्ट ड्रिंक बनाने हेतु, फर्मेन्टेड जूस में चीनी एवं मसाला मिलाएं, गरम करे और पेश करें।

 

प्रारंभिक तैयारी

      फर्मेन्टेड सब्जियां खट्टी होती हैं अत: इसे पानी से सम्पूर्णतया धो लो। यह एसिड एवं नमक दोनो को हटाएगा। अपने स्वादानुसार मिश्रण को पकाएं।

 

फर्मेन्टेड जूस

      फर्मेन्टेड जूस को फेंकने के बजाय आप इसका उपयोग एक पोषक पेय के रूप में कर सकते हैं। फर्मेन्टेड सब्जियों का जूस विटामिन बी एवं सी से भरपूर होता है। यह एक अच्छा एपीटाइजर (भूख लगने) का काम करता है। इसीलिए इसे खाने से पहले दिया जाता है तथा यह करी के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।