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परिचय

      देश में श्वेत बटन मशरूम (एगेरिकस बाइस्पोरस) प्रजाति की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। उत्पादन की दृष्टि से इस मशरूम का विश्व में प्रथम स्थान है। देश के मैदानी एवं पहाड़ी भागों में श्वेत बटन मशरूम को शरद ऋतु में उगाया जाता है क्योंकि इस ऋतु में तापमान कम तथा हवा में नमी अधिक होती है। इस मशरूम के उत्पादन के लिए कवक जाल फैलाव के दौरान 22-25 डिग्री सेल्सियस तथा फलन के समय 14-18 डिग्री सेल्सियस तापमान की आश्यकता होती है तथा 80-85 प्रतिशत नमी की जरूरत पड़ती है। शरद ऋतु के आरम्भ व अन्त में इस तापमान व नमी को आसानी से बनाये रखा जा सकता है।

      मश्­रूम के उत्पादन के लिए खेती करने का तरीका खाद्यन्न एंव बागवानी फसलों से बिल्कुल भिन्न है अत: इसकी खेती शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना हितकर होता है। फिर भी, प्रारम्भिक जानकारी देने के उद्देश्य से श्वेत बटन मशरूम की खेती करने का विवरण निम्न प्रकार है :

 

श्वेत बटन मशरूम (खुम्ब) उगाने का तरीका

      मशरूम को कृत्रिम

1.     लघु अवधि विधि         

2.    लम्बी अवधि विधि

      लघु अवधि विधि से खाद तैयार करने में समय कम लगता है लेकिन इसके लिए अधिक पूजीं व संसाधनों की आवश्यकता होती है तथा यह विधि लघु स्तर पर खुम्ब उत्पादन की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। लघु स्तर पर खुम्ब उत्पादन करने के लिए लम्बी अवधि विधि से खाद तैयार करना उचित माना जाता है। अत: यहां पर लम्बी अवधि विधि से कम्पोस्ट तैयार करने की विधि का विवरण दिया जा रहा है ।

 

     लम्बी अवधि विधि से खाद (कम्पोस्ट) तैयार करना

      खाद में प्रयुक्त सामग्री व उसकी मात्रा निम्नलिखित है :

सूत्र नं: 1

1.     गेहूं का भूसा                                                    300 किलोग्राम

2.    केल्शियम अमोनियम नाईटे्रट (कैन) खाद         9 किलोग्राम

3.    यूरिया खाद                                                       4.5 किलोग्राम

4.    म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद                                   3 किलोग्राम

5.    सुपर फास्फेट खाद                                            3 किलोग्राम

6.    चोकर (गेहूं का)                                                 15 किलोग्राम

7.    जिप्सम                                                             20 किलोग्राम

सूत्र नं: 2

1.     भूसा और पुआल (बराबर मात्रा में)                   300 किलोग्राम

2.    केल्शियम अर्मोनियम नाईटे्रट खाद                  9 किलोग्राम

3.    यूरिया खाद                                                       4 किलोग्राम

4.    चोकर                                                                25 किलोग्राम

5.    जिप्सम                                                             20 किलोग्राम

      ऊपर लिखे किसे एक सूत्र को चुनकर नीचे दिये गये चरणों में कम्पोस्ट तैयार करें ।

1.    मिश्रण तैयार करना

      भूसे या भूसे तथा पुआल के मिश्रण को पक्के फर्श पर 2 दिन (48 घण्टों) तक रूक-रूम कर पानी का छिड़काव करके गीला किया जाता है। भूसे को गीला करते समय पैरों से दबाना अच्छा रहता है। साथ ही गीले भूसे की

2.    गीले किये गये मिश्रण (भूसे व उर्वरक आदि) को मिलाकर 5 फुट चौड़ा व 5 फुट ऊँचा

3.    पलटाई क्रम

क)    पहली पलटाई (6वां दिन)

      छटे दिन

ख)    दूसरी पलटाई (10वां दिन)

ग)    तीसरी पलटाई (13वां दिन): इस पलटाई के समय जिप्सम भी मिलायें ।

घ)    चौथी पलटाई (16वां दिन)

ड़)    पांचवी पलटाई (19वां दिन)

च)    छटी पलटाई (22वां दिन)

छ)    सातवीं पलटाई (25वां दिन): इस पलटाई के समय नुवान या मैलाथियान (0.1 प्रतिशत) का छिड़काव करें ।

ज)    आठवीं पलटाई (28वां दिन)

      अटइइसवें दिन खाद (कम्पोस्ट) में अमोनिया व नमी का परीक्षण किया जाता है। नमी का स्तर जानने के लिए खाद को मुट्ठी से दबाते हैं, यदि दबाने पर हथेली व उंगलियां गीली हो जायें परन्तु खाद से पानी निचुड़कर न बहे, इस अवस्था में खाद में नमी का स्तर उचित होता है तथा ऐसी दशा में कम्पोस्ट में 68-70 प्रतिशत नमी मौजूद होती है।

      अमोनिया का परीक्षण करने के लिए खाद को सूंघा जाता है। सूंघने पर यदि अमोनिया की गंध (गोशाला में पशु मूत्र जैसी गंध) आती है तो 3 दिन के अंतर से एक या दो पलटाई और देनी चाहिए । अब अमोनिया की गंध बिल्कुल समाप्त हो जाये तब खाद को 25 डिग्री सेल्सियस तापमान तक ठण्डा होने दें, तत्पश्चात् बीजाई करके थैलों में भर दें ।

 

बीजाई (स्पानिंग) करना

      उपरोक्त विधि से तैयार खाद में बीज (स्पॉन) मिलाया जाता है। बीज देखने में श्वेत व रेशमी कवक जालयुक्त हो तथा इसमें किसी भी प्रकार की अवांछित गंध ना हो । बीजाई करने से पहले बीजाई स्थान बीजाई में प्रयुक्त किये जाने वाले बर्तनों को 2 प्रतिशत फार्मेलीन घोल से धोयें व बीजाई का कार्य करने वाले व्यक्ति अपने हाथों को साबुन से धोयें ताकि खाद में किसी प्रकार के संक्रमण से बचा जा सके। इसके पश्चात् 0.5 से 0.75 प्रतिशत की दर से बीज (स्पॉन) मिलायें यानि कि 100 किलोग्राम तैयार कम्पोस्ट के लिए 500-700 ग्राम बीज पर्याप्त है।

 

बीजित खाद को पॉलीथीन के थैलों में भरना व कमरों में रखना

      किसी हवादार कमरे में लोहे या बांस या अन्य प्रकार की मजबूत लकड़ी की सहायता से लगभग दो-दो फुट की दूरी पर कमरे की ऊँचाई की दिशा में (अलमारी के समान) एक के ऊपर एक मचान बना लें । यह कार्य बीजाई करने से पहले कर लेना चाहिए । खाद भरे थैले रखने से 2 दिन पहले इस कमरे के फर्श को 2 प्रतिशत फार्मेलीन घोल से धोयें तथा दीवारों व छत पर इस घोल का छिड़काव करें। इसके तुरन्त बाद कमरे के दरवाजे तथा खिड़कियां इस तरह बंद करें कि अंदर की हवा बाहर न जा सके।

      अब बीजाई करने के साथ-साथ 10-15 किलोग्राम बीजित खाद को पॉलीथीन के थैलों में भरते जायें तथा थैलों का मुंह कागज की थैली के समान पॉलीथीन मोड़कर बंद कर दें । यहां यह ध्यान रखें कि थैले में खाद एक फुट से ज्यादा न हो। इसके पश्चात् इन थैलों को कमरे में बने बांस के टांड पर एक दूसरे से सटाकर रख दें । कमरे में 22-25 डिग्री सेल्सियस तामपान व 80-85 प्रतिशत नमी बनाये रखें । तापमान को बिजली चालित उपकरणों जैसे कूलर, हीटर आदि का प्रयोग करे नियंत्रित किया जा सकता है। नमी कम होने पर कमरे की दीवारों पर पानी का छिड़काव करके व फर्श पर पानी भरकर नपमी को बढ़ाया जा सकता है।

 

केसिंग मिश्रण तैयार करना व केसिंग परत चढ़ाना

      बीजाई के लगभग 12-15 दिन बाद कवक जाल (बीज के तन्तु) खाद में फैल जाता है और खाद का रंग गहरे भूरे से बदलकर फफूंद जैसा सफेद हो जाता है। इस अवस्था में खाद को केंसिग मिश्रण की परत से

 

मशरूम की तुड़ाई, भण्डारण व उपज

      मशरूम कलिकायें बनने के लगभग 2-4 दिन बाद यह मशरूम कलिकायें विकसत होकर बड़े-बड़े मशरूमों में परिवर्तित हो जाती है। जब इन मशरूमों की टोपी का आकार 3-4 सें.मी. हो तथा टोपी बंद हो (छत्रक न बना हो) तब इन्हें परिपक्व समझना चाहिये और मरोड़ कर तोड़ लेना चाहिए । तुड़ाई के पश्चात् शीघ्र ही इन मशरूमों को उपयोग में ले आना चाहिए क्योंकि यह जल्दी खराब होने वाल सब्जी है। सामान्य तापमान पर मशरूम को तोड़ने के बाद 12 घंटों तक सही अवस्था में रखा जा सकता है। इसे 2-3 दिन तक फ्रिज में रख सकते हैं। लम्बें समय तक भण्डारण करने के लिए मशरूम को 18 प्रतिशत नमक के घोल में रखा जा सकता है।

      इस प्रकार प्रतिदिन मशरूम की पैदावार मिलती रहती है तथा 8-10 सप्ताह में पूरा उत्पादन मिल जाता है। एक क्विटल कम्पोस्ट से औसतन 12 किलोग्राम खुम्ब की उपज प्राप्त होती है।

आमदनी

      मौसमी श्वेत बटन मशरूम उत्पादन करने में प्रति किलोग्राम रूपये 10-15रु- का खर्च आता है। कम से कम 20-30 रूपये प्रति किलोग्राम बचत हो जाती है।

 

ढ़ींगरी व मिल्की मशरूम

      श्वेत बटन मशरूम के अतिरिक्त गर्मी के दिनों में ढ़ींगरी व मिल्की मशरूम की खेती भी सारे राज्य में सफलतापूर्वक की जा सकती है। उपरोक्त मशरूप की दोनों प्रजातियां 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान तक अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है। उपरोक्त प्रजातीयों की खेती व देखभाल पर खर्चा भी बहुत कम आता है। इनकी खेती विभिन्न प्रकार के कृषि अवशेषों पर की जा सकती है परन्तु गेहूं व धान का भूसा बहुत प्रचलित कृषि अवशेष है।

      ग्रीष्मकाल में ली जाने वाली ढ़ींगरी की मुख्य किस्में हैं, प्लूरोटस लेविलेटस (मार्च से जून), प्लूरोटस सैपिडस (मार्च से जून), प्लूरोटस साजर काजू (मार्च से अक्तूबर) इत्यादि ।

      इसी प्रकार मिल्की मशरूम की प्रजातीयों में से कैलोसाईबी इंडिका (मार्च से मई) मुख्य प्रजाती है।