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करौंदा के पेय पदार्थ एवं उनका प्रसंस्करण

करौंदे का वानस्पतिक नाम Carissa carandas L. है जोकि एपोसिन्सी परिवार से संबंध रखता है । भारतीय मूल का यह एक बहुत ही सहिष्णु, सदाबहार, कांटेदार झाड़ीनुमा पौधा है । करौंदा के फल बहुत खट्टे व तीखे होने के कारण कच्चे नहीं खाए जा सकते अपितु इनसे बहुत ही स्वादिष्ट एवं पौष्टिक खाद्य व पेय पदार्थ बनाए जा सकते हैं जिन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचकर काफी लाभ कमाया जा सकता है । इन उत्पादों का सेवन करने के महिलाओं की मुख्य समस्या 'रक्तहीनता' (एनीमिया) से छूटकारा पाया जा सकता है । ग्रामीण व शहरी भाई-बहन इस पौष्टिक फल के उचित प्रसंस्करण एवं परिरक्षण द्वारा मांग का भरपूर फायदा उठा सकते हैं । करौंदा से निर्मित पेय पदार्थो जैसे आर.टी.एस. बैवरेज (तुरंत पेय पदार्थ), स्क्वैश व शरबत में उपयोग होने वाली सामग्री एंव निर्माण विधि का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है:

(क)  रस (जूस) निकालना

करौंदे के विभिन्न पेय पदार्थ बनाने हेतु पके फलों का रस निकालना आवश्यक है । इसके लिए ताजा फलाें को धोकर स्टेनलेस स्टील के चाकू द्वारा छोटे-छोटे टुकड़े काटें । टुकड़ों के तोल की बराबर मात्रा में पानी मिलाकर 800 सेंटीग्रेड तक गर्म करें । गर्म करते समय फल के टुकड़ों को कड़छी से कुचलते भी रहें । स्वच्छ मलमल के कपड़े द्वारा इसे छानकर फलों का रस प्राप्त करें । गुलाबी रंग वाले करौंदे के फल रस निकालने हेतु उपयुक्त होते हैं। फल रस को मापकर नीचे दी गई सामग्री एवं प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी द्वारा विभिन्न पेय पदार्थ तैयार कर सकते हैं ।

(क)  करौंदा के पेय पदार्थ

1.   आर.टी.एस.पेय (तुरंत पेय पदार्थ)

इस पेय पदार्थ में रस की प्राकृतिक संरचना चीनी, सिट्रिक अम्ल व पानी का शरबत मिलाकर बदल दी जाती है । फल खाद्य नियम के अनुसार इस पेय पदार्थ में कम से कम 10 प्रतिशत फल रस/गुद्दा व 10 प्रतिशत कुल घुलनशील तत्व होने चाहिए । लेकिन करौंदा के तुरंत पेय पदार्थ में 10 प्रतिशत फल रस, 14 प्रतिशत कुल घुलनशील तत्व व 0.27 प्रतिशत खटास अच्छा रहता है ।

समाग्री

करौंदा रस                            -     1 लीटर

चीनी                                -     1.350 किलोग्राम

सिट्रिक अम्ल                         -     12 ग्राम

(चीनी+सिट्रिक अम्ल+पानी) का           -     9 लीटर

प्रसंस्करण विधि

      भाग'' में दी गई रस निकालने की विधि द्वारा करौंदा के फलों का रस निकाल कर माप लें । एक लीटर रस के लिए एक किलो 350 ग्राम चीनी व 12 ग्राम सिट्रिक अम्ल को एक लीटर पानी में एक उबाल देकर चीनी का शरबत तैयार करें । शरबत से  मैली व झाग हटाकर ठण्डा होने दें और साफ मलमल के कपड़े से छानकर स्वच्छ चीनी का शरबत प्राप्त करें । तैयार शरबत को फल रस में अच्छी तरह मिलाएं और अतिरिक्त पानी मिलाकर पेय पदार्थ का कुल माप दस लीटर बना लें । इसमें अब थोड़ा-सा मंजूरशुदा नारंगी लाल रंग व कृत्रिम सुगंध (एसेन्स) भी मिला लें । तैयार पेय पदार्थ को 200 मिलीलीटर क्षमता वाली स्वच्छ, कीटाणु रहित आर.टी.एस. की बोतलों में ऊपरी 2.5 से 3 सैंटीमीटर भाग खाली छोड़कर भर दें व क्राऊन कार्क द्वारा सीलबंद करें । भरी हुई बोतलों को उबलते पानी में 25 से 30 मिनट तक कीटाणु रहित करें । इन्हें अब हवा में ठण्डी करके किसी स्वच्छ, सूखे व ठंडे स्थान पर भण्डारण करें और सेवन करने से पहले अच्दी तरह ठंडी कर लें ।

1.   स्क्वैश

      करौंदा के स्क्वैश को भी निकाले गए रस/गुद्दा में चीनी, सिट्रिक अम्ल व पानी के बने शरबत को मिलाकर तैयार किया जाता है । इसमें कम से कम 25 प्रतिशत फल भाग व 40 प्रतिशत कुल घुलनशील तत्व होने चाहिएं ।

 

 

 

 

सामग्री

करौंदा रस

 

1 लीटर

 

पानी

 

1 लीटर

 

चीनी

 

1.8 कि.ग्रा.

 

सोडियम बैंजोएट

 

3 ग्राम

 

सिट्रिक अम्ल

 

15 ग्राम

 

(परिरक्षक)

 

 

प्रसंस्करण विधि

      करौंदा स्क्वैश की प्रसंस्करण विधि इसके 'तुरंत पेय पदार्थ' की तरह ही है । अंतर केवल यह है कि स्क्वैश में फल रस व चीनी की मात्रा बढ़ा दी जाती है और परिक्षण के लिए सोडियम बैंजोएट नामक परिरक्षक का प्रयोग किया जाता है । तैयार स्क्वैश में थोड़ा सा नारंगी लाल रंग व कृत्रिम सुगंध भी इच्छानुसार मिलाए जा सकते हैं । इसे 700 मिलीलीटर क्षमता वाली स्वच्छ कीटाणु रहित स्क्वैश की बोतलों में ऊपरी 2.5 से 3 सैं.मी भाग खाली छोड़कर भर दिया जाता है । बोतलों को तुरंत सीलबंद कर, लेबिल लगा कर किसी साफ, ठंडे व शुष्क स्थान पर भण्डारण करें । परोसने के समय एक भाग स्क्वैश में तीन से चार भाग (स्वादानुसार) ठंडा पानी मिलाएं ।

3.   शरबत

      करौंदा के शरबत में फल भाग कम से कम 25 प्रतिशत व कुल घुलनशील तत्व 65 प्रतिशत होने चाहिएं । इसमें मंजूरशुदा रंग व कृत्रिम सुगंध भी मिलाई जा सकती है । लेकिन परिरक्षक पदार्थ का प्रयोग(स्क्वैश की तरह) केवल तब ही करें जब शरबत को लंबे समय तक सुरक्षित करना हो ।

 

 

 

 

सामग्री

करौंदा रस

 

1 लीटर

 

सिट्रिक अम्ल

 

20 ग्राम

 

चीनी

 

2 कि.ग्रा.

 

पानी

 

500 मि.ली.

 

प्रसंस्करण विधि

      करौंदा के शरबत को इसके तुरंत पेय पदार्थ व स्क्वैश की तरह ही तैयार करते हैं । फर्क केवल इतना होता है कि शरबत में चीनी व सिट्रिक अम्ल (खटास) की मात्रा स्क्वैश की अपेक्षा थोड़ी सी और बढ़ा दी जाती है ताकि तैयार शरबत परिरक्षक के बिना लंबे समय तक सुरक्षत रहे। अगर शरबत को एक वर्ष से ज्यादा समय के लिए सुरक्षित रहे । अगर शरबत को एक वर्ष से ज्यादा समय के लिए सुरक्षित रखना हो तो स्क्वैश की तरह ही शरबत में भी रासायनिक परिरक्षक का प्रयोग करें । तैयार शरबत को 700 मि.ली. भाग खाली छोड़कर भर दें। भरी हुई शरबत की बोतलों को सीलबंद कर, लेबिल लगा कर किसी स्वच्छ, शुष्क व ठंडे स्थान पर भण्डारण करें । सेवन करते समय एक भाग शरबत में 5 से 6 गुणा (स्वादानुसार) ठंडा पानी मिलाएं ।