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हमारे देश के किसान प्राचीन काल से दूध को खराब होने से बचाने के लिए घी बनाते रहे हैं। हरियाणा के अधिकतर किसान विश्ब प्रसिध्द मुर्रा नस्ल पालते हैं तथा गाँवों में दूध से घी निकालना एक प्राचीन कला है। भैंस के दूध में घी की मात्रा 6 से 8 प्रतिशत तक होती है। घी मानव पोषण में ऊर्जा का श्रेष्ठ स्त्रोत है तथा मानव शरीर के लिए आवश्यक फैटी एसिड्स की पूर्ति भी करता है। देश के कुल दूध उत्पादन के 39 प्रतिशत का घी बनाया जाता है। शुध्द घी में पानी की मात्रा 0.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा वसा की मात्रा 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए। इस वसा में 98 प्रतिशत ग्लिसराइड्स तथा बाकी हिस्से में फास्फोलिपिड्स, कोलेस्ट्राल, फैटी एसिड्स, कैरोटीन, विटामिन ए, विटामि ई तथा बहुत कम मात्रा में फास्फोरस, कैल्शियम, कॉपर, आयरन आदि पाए जाते हैं।

     गाँव में अधिकतर महिलाएं घी बनाने के लिए भी निकलने की देसी विधि का प्रयोग करती हैं। इस विधि में पहले दूध का दही जमाया जाता है। दही को मथानी के द्वारा मथकर मक्खन को लस्सी से अलग किया जाता है तथा फिर मक्खन को कड़ाही या चौड़े मँह के बर्तन में आग पर गर्म करके घी निकाला जाता है। इसे कम तापमान पर गर्म करते हैं। इस प्रकार का घी स्वाद व देखने में अच्छा होता है, परन्तु अधिक समय तक रखने से खराब हो जाता है। स्वच्छ, शुध्द व अधिक समय तक खराब न होने वाला घी बनाने के लिए निम्नलिखित सावधानियां रखें।

1- स्वच्छ व ताजा दूध का प्रयोग करें।

2- दूध को कम से कम 10 मिनट तक उबालें तथा तुरन्त ठण्डा करें।

3- अच्छी प्रकार का जामुन/खट्टा दही आदि दूध का दही बनाने में प्रयोग करें। जाड़ों में 2-2.5 प्रतिशत तथा गर्मियों में 1 प्रतिशत खट्टे का प्रयोग करें। जामुन लगे दूध का जाड़ों में 12-15 घंटे तथा गर्मियों में 8-10 घंटे तक रखें इससे दही में 0.8-1.0 प्रतिशत अम्लीयता आ जाएगी।

4- ताजा दही को मथें। जाड़ों में हल्का सा गर्म पानी व गर्मियों में ठण्डा पानी दही मथते समय डालकर धीरे-धीरे मथकर साफ कर लें।

5- मक्खन को घी निकालने से पहल अधिक समय तक न रखें। यदि रखना आवश्यक हो तो 1 प्रतिशत नमक के पानी में घोल बनाकर मक्खन उस घोल में डालकर मिट्टी के बर्तन में रखें।

6- स्वच्छ घी बनाने के लिए मक्खन को 80 डिग्री सैंटीग्रेडपर 30 मिनट तक गर्म करे। अब पानी को निथारकर अलग कर दें। ऊपरी सतह पर घी तथा दही होता है इसे स्टील के बर्तन में गर्म करें। जब घी चटकने की आवाज करने लगे तब पानी खत्म होता है। इसके बाद धीमी ऑंच पर कुछ समय तक गर्म करें।

7- अब घी को साफ कपड़े से छान लें तथा घी को मिट्टी या इनेमल के बर्तन में ऊपर तक भरकर ठण्डे स्थान पर रखें।

गाँव में देसी विधि से बनाए गए घी में दूध 88 से 90 प्रतिशत वसा आ जाती है। यह अच्छी सुगन्ध वाला तथा दानेदार होता है। घी निकालने की और भी विधि है जिनमें दूध की क्रीम निकालकर तथा क्रीम का मक्खन बनाकर घी निकाला जाता है। घी बनाने के बड़े प्लांट होते हैं जिनमें ऊपर की विधियों से अलग तरीक से घी बनाया जाता है।

गर्म करने पर घी विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है जो निम्नलिखित है।

1-मक्खन 30 - 60 डिग्री सैंटीग्रेड पर पिघलता है।

2-मक्खन का तापमान 64 डिग्री सैंटीग्रेड से बढ़ने पर झाग बनते हैं तथा इसका आकार तब तक बढ़ता जाता है जब तक कि तापमान 94 डिग्री सैंटीग्रेड पहँचता है।

3-पिघले हुए मक्खन का पानी वाष्प बनकर 94-95 डिग्री सैंटीग्रेड पर विशेष आवाज के साथ निकलता है। जब तक पूरा पानी समाप्त हो यही तापमान रहता है।

4-पानी की आखिरी बँद समाप्त होने तक तापमान 98 डिग्री सैंटीग्रेड हो जाता है। इस समय तरल पदार्थ गाढ़ा होना शुरू हो जाता है तथा उसमें से बुलबुले निकलने लगते हैं तथा चटकने की आवाज होती है।

5-तापमान के 110 डिग्री सैंटीग्रेड पहँचने पर दही के थक्के बनने लगते है। तथा वह घी की सतह पर आ जाते हैं।

6-यह थक्के तापमान के 120 डिग्री सैंटीग्रेड पहँचने पर बर्तन की तली पर जमा होने लगते हैं तथा घी की ऊपरी सतह साफ हो जाती है।

7-तापमान के 120 डिग्री सैंटीग्रेड के ऊपर जाने पर घी से निकलने वाले बड़े बुलबुले छोटे बुलबुलों में बदल जाते हैं तथा इनका झाग बनकर आकार में बढ़ता है, यह घी तैयार होने की आखिरी अवस्था है। इस समय बर्तन को आग से हटा लेना चाहिए। इस तापमान तक घी को उबालना चाहिए। कम गर्म करने से घी को रखने की क्षमता घट जाती है और अधिक गर्म करने पर उसमें जलने की गन्ध आ जाती है। अधिक गर्म करने पर विटामिन ए का नुकसान भी होता है।

घी की गुणवत्ताा, दूध, दही, मक्खन, क्रीम आदि की गुणवत्ताा, बनाने की विधि, घी बनाने का तापमान, घी का भण्डारण आदि जानवरों के पोषण पर निर्भर करते हैं। घी की गुणवत्ताा जानने के लिए उसकी सुगन्ध, अम्लीयता तथा परॉक्साइड को मापा जाता है। घी की अच्छी सुगन्ध लाने के लिए इसे 120 डिग्री सैंटीग्रेड पर गर्म करना चाहिए जबकि 110 डिग्री सैंटीग्रेड पर घी में दूध जैसी गन्ध आती है। देसी तरीक से बने घी में सबसे अच्छी खुशबू आती है। क्रीम या मक्खन में 0.3 से 0.4 प्रतिशत लैक्टिक एसिड होने पर अच्छा घी बनता है।

घी का भण्डारण करने के लिए पोरसेलीन, इनैमल व जिंक की लाइन वाले टिन को प्रयोग में लाएं। बर्तन को मुँह तक भरें जिससे अन्दर हवा न रहे। भण्डारण ठण्डे व अंधेरे स्थान पर करें। घी को अधिक समय तक रखने के लिए एंटीऑक्सीडेन्ट जैसे ब्यूटाइल हाईड्रोक्सी एनीसोल तथा ब्यूटाइल हाईड्रोक्सी टॉलीन आदि परिरक्षणों का प्रयोग कुल वसा की 0.22 प्रतिशत किया जा सकता है।